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मानव बनाम महामारी
युद्धशास्त्र का यह सामान्य सिद्धांत हैं कि हमलावर को परास्त करने के लिये जिन पर हमला होता हैं उन सबने पूरी एकाग्रता से हमलावर को घेर कर परास्त करना चाहिये।हमारी इस विशाल धरती के सबसे बुद्धिशाली मानवों पर ही धरती के हर हिस्से पर महामारी का हमला हुआ है।युद्धशास्त्र के कायदे से तो इस धरती…
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आन्दोलन जीवन का प्रवाह है
जीवन गतिहीन निस्तेज जड़ता न होकर नित नये प्रवाह की तरह निरन्तर गतिशील तेजस्विता का पर्याय है।किसी सरकार का आना-जाना बनना बिगड़ना महज एक घटना है।प्राय:सरकारें लकीर की फकीर की तरह होती हैं पर जनआन्दोलन हर बार सृजनात्मक परिवर्तन की नयी नयी लकीरें खींचना चाहता हैं।हर आन्दोलन का मूल विचार एकदम सफल ही हो यह…
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भारत में संकीर्ण राजनीतिक हलचलों से दूर अपने आप उभरते वैश्विक परिवार
भारत सनातन सभ्यता को समझने वाला देश हैं। भारतीय समाज में इन दिनों ऐसी हलचलों का हल्ला गुल्ला जरूरत से ज्यादा चल रहा है जिससे आभास होता है कि भारत में तेजी से व्यापक सोच का दायरा दिन प्रतिदिन घटता जा रहा है। भारत की कई राजनैतिक जमाते संकीर्ण सोच के उभार को ही अपना…
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आनन्द का सनातन प्रवाह
हिन्दूदर्शन या सनातन विचार ने विचार के चैतन्य स्वरूप या तारक शक्ति के विराट स्वरूप को समझाऔर सनातन सभ्यता के रूप में निरन्तर विस्तारित किया।जीवन और जीव की जड़ता या मारक शक्ति को स्वीकार नहीं किया।अंधकार है तो प्रकाश की ओर बढ़ो,धूल और धुआं है तो दूर हट जाएं स्थान बदल दें या तात्कालिक उपाय…
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इको सिस्टम बनाम ईगो सिस्टम
इको सिस्टम और ईगो सिस्टम दोनों ही इस धरती पर जीवन की गुणवत्ता को गहरे से प्रभावित करते हैं।हवा ,पानी ,प्रकाश, मिट्टी और अनन्त रूप स्वरूप की वनस्पतियों से इको सिस्टम अस्तित्व में आया। इको सिस्टम को जीवन का बीज भी कह या मान सकते हैं। इसी तरह मन, विचार, लोभ ,लालसा या इच्छा, समृद्धि-…
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हमारी पसंद नापसंद और गांधी के सनातन जीवन मूल्य
सत्य सनातन है,सत्य की महत्ता सब स्वीकारते हैं। हमारे समूचे जीवन के प्रसंगों में आजीवन सत्य को अपनाने की हम सब प्रायःहिम्मत ही नहीं जुटा पाते। ऐसा करते हुए हम झिझकते भी नहीं।असत्य,सत्य का न होना न होकर सत्य को अपनाने की हिम्मत का न होना है। गांधी ने अपने जीवन को सत्य के प्रयोग…
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समय भी प्रकाश जैसा ही है सनातन नित्य नूतन।
समय सदैव अबाध और नित्य नूतन स्वरूप में मौजूद हैं। पर हम हमारी समझ और सुविधा के लिए उसकी गणना कर उक्त मनुष्यकृत गणना के संदर्भ में ही हम सभी मनुष्य समय से साक्षात्कार करते हैं। जैसे प्रकाश सदैव है पर पृथ्वी की निरन्तर गतिशीलता से हमें दिन – रात की अनन्त काल से अनुभूति…